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Dr. Iqbal Sayyed (Homeopathy) needs a second opinion on this medical case.
जामुन : मुंह में छाले होने पर जामुन का रस लगाएं। वमन होने पर जामुन का रस सेवन करें। भूख न लगती हो तो कुछ दिनों तक भूखे पेट जामुन का सेवन करें। जामुन के पत्तों का रस तिल्ली के रोग में हितकारी है। जामुन के पेड़ की छाल का काढ़ा बनाकर पीने से पुराने दस्त बंद हो जाते हैं एवं मसूढ़ों की सूजन भी कम होती है। जामुन के पेड़ की छाल को गाय के दूध में उबालकर सेवन करने से संग्रहणी रोग दूर होता है। जामुन पत्तों की भस्म को मंजन के रूप में उपयोग करने से दाँत और मसूड़े मजबूत होते हैं। जामुन की गुठलियों को सुखाकर पीस लें। इस पावडर को फाँकने से मधुमेह में लाभ होता है तथा इस पावडर में थोड़ा-सा गाय का दूध मिलाकर मुंहासों पर रात को लगा लें, सुबह ठंडे पानी से मुंह धो लें। कुछ ही दिनों में मुंहासे मिट जाएंगे। कब्ज और उदर रोग में जामुन का सिरका उपयोग करें। जामुन का सिरका भी गुणकारी और स्वादिष्ट होता है, इसे घर पर ही आसानी से बनाया जा सकता है और कई दिनों तक उपयोग में लाया जा सकता है।
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